
पीलीभीत: स्कूल बंद होने से वंचित बच्चे, ग्राम प्रधान पति का प्रदर्शन – शिक्षा के अधिकार पर संकट
ब्यूरो रिपोर्ट सत्यजीत सरकार
उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। माला कंजा हरैया गांधी नगर कॉलोनी स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय के बंद होने से छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र का भूगोल बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहां आए दिन बाघ और अन्य जंगली जानवरों का आतंक बना रहता है। ऐसे हालात में बच्चों के लिए दूर-दराज़ स्थित स्कूलों तक पैदल जाना न सिर्फ कठिन बल्कि जीवन के लिए भी खतरे से खाली नहीं है।

ग्रामवासियों का कहना है कि यह इलाका मुख्य रूप से गरीब और मजदूर परिवारों का है। इन परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने में सक्षम नहीं हैं। फलस्वरूप, जब से यह सरकारी विद्यालय बंद हुआ है, तब से सैकड़ों छात्र-छात्राएं घर पर ही बैठने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाने से अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है, वहीं भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

विद्यालय बंद होने की समस्या को लेकर ग्राम प्रधान पति पंकज मित्रा ने आगे आकर आवाज़ उठाई है। उन्होंने विद्यालय गेट के सामने प्रदर्शन किया और प्रशासन को चेताया कि शिक्षा से किसी भी बच्चे को वंचित नहीं किया जा सकता। पंकज मित्रा का कहना है कि वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या संबंधित मंत्री से मुलाकात करेंगे और विद्यालय को पुनः शुरू करवाने की मांग रखेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह केवल एक विद्यालय बंद होने का मामला नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के बच्चों के भविष्य का सवाल है।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द विद्यालय को पुनः खोला जाए, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें। क्षेत्र में विद्यालय बंद होना, जंगलों का खतरा और आर्थिक तंगी—ये सभी मिलकर शिक्षा के अधिकार पर गहरी चोट कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता से कदम उठाती है।
👉 निष्कर्ष: माला कंजा हरैया का यह मामला केवल पीलीभीत ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो न सिर्फ बच्चे अशिक्षा के अंधकार में चले जाएंगे बल्कि उनके भविष्य के सपने भी अधूरे रह जाएंगे।


